शनिवार, 19 सितंबर 2026

पूर्णिया डायरी-25 (रिचर्ड समनर पूर्णिया के दूसरे कलेक्टर)

रिचर्ड समनर पूर्णिया ज़िले के दूसरे कलेक्टर थे। जेरार्ड गुस्तावस ड्युकारेल (G. G. Ducarel) के बाद 1781 मे रिचर्ड समनर पूर्णिया के कलेक्टर बने। वे गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स के सबसे अंतरंग सहयोगियों और विश्वासपात्र अफ़सरों में गिने जाते थे। वे 1769–70 में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेवा में 'राइटर' के रूप में फोर्ट विलियम (कलकत्ता) पहुँचे थे। उनकी निष्ठा और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए उन्हें 1781 में पूर्णिया का कलेक्टर नियुक्त किया गया।

                               ‌       (चित्र प्रतीकात्मक)

​पूर्णिया उस समय एक अत्यंत संवेदनशील सीमांत ज़िला था, जो नेपाल और भूटान की सीमाओं से सटा हुआ था तथा 1770 के भीषण अकाल (छियत्तर का मन्वंतर) के दुष्प्रभावों से उबरने का प्रयास कर रहा था। रिचर्ड समनर ने पूर्णिया ज़िले में राजस्व सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने धरमपुर, हवेली पूर्णिया और असुर्जा जैसे विशाल परगनों में स्थानीय इज़ारेदारों और ज़मींदारों के बही-खातों की गहन पड़ताल की तथा बकाया मालगुज़ारी की वसूली को नियमित किया।

​सामरिक दृष्टिकोण से भी उन्होंने सीमा की सुरक्षा को सुदृढ़ किया और क्षेत्र में सक्रिय सन्यासी व फ़कीर विद्रोहियों के छापों को रोकने के लिए सैन्य दस्तों तथा सीमावर्ती चौकियों का पुनर्गठन किया।

1 टिप्पणी:

  1. इस अवधि में कंपनी जमींदारों और तालुकदारों के माध्यम से राजस्व settlement को सुदृढ़ कर रही थी, ताकि revenue collection regular और predictable हो सके। यह प्रयात केवल Sumner की व्यक्तिगत पहल नहीं, बल्कि व्यापक Bengal revenue policy का अभिन्न अंग था। इसी संदर्भ में, पूर्णिया जैसे दूरस्थ जिलों में पारंपरिक स्थानीय प्रशासन को क्रमशः company के जिला-आधारित प्रशासनिक ढांचे में परिवर्तित किया गया, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत हो सके।

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