सन् 1769 में जेरार्ड गुस्तावस डुकारेल (Gerard Gustavus Ducarel) को पूर्णिया का पहला सुपरवाइजर नियुक्त किया गया।
नियुक्ति का उद्देश्य स्थानीय भू-राजस्व व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, मालगुजारी के पुराने अभिलेखों की जांच करना, उत्पादन क्षमता को समझना और कंपनी के राजस्व को नियमिमित व अधिकतम करना।
डुकारेल का कार्यकाल 1769–1770 के भीषण बंगाल और बिहार के महाअकाल (Chhiattarer Manwantar) के समानांतर था। इस दौर में पूर्णिया की एक बड़ी आबादी अकाल और भुखमरी की शिकार हुई, लेकिन कंपनी के कड़े आदेशों के कारण राजस्व वसूली की कठोरता में कोई रियायत नहीं बरती गई।
सुपरवाइजर यूरोपीय अधिकारी होते थे, जिन्हें स्थानीय भाषा, भूमि बंदोबस्त की बारीकियों और प्रथागत कानूनों की गहरी समझ नहीं होती थी। इसलिए उनकी सहायता के लिए एक स्थानीय वित्तीय प्रमुख या 'दीवान' की नियुक्ति की जाती थी। पूर्णिया में डुकारेल के दीवान के रूप में देवी सिंह को नियुक्त किया गया।
देवी सिंह पूर्णिया में राजस्व आकलन, कर निर्धारण और वास्तविक वसूली के प्रमुख सूत्रधार थे। डुकारेल काफी हद तक उनके प्रशासनिक कौशल और वित्तीय तंत्र पर निर्भर थे।
पूर्णिया में डुकारेल और देवी सिंह की यह साझेदारी भारतीय प्रशासनिक इतिहास में उस शुरुआती दौर का उदाहरण है जब पारंपरिक भारतीय दीवानी व्यवस्था को ब्रिटिश उपनिवेशवादी नौकरशाही में बदला जा रहा था। 1769 का यह सुपरवाइजर पद ही आगे चलकर कलेक्टर (District Collector) के पद में विकसित हुआ।
सुबोध
20.9.2026
Very good information
जवाब देंहटाएंआपका नाम या संपर्क नंबर नहीं दिख रहा है क्या आप पूर्णिया से हैं
हटाएंशानदार है पूर्णिया की कहानी,और पढ़ने की जिज्ञासा है---
जवाब देंहटाएंधन्यवाद श्रीमान पूर्णिया डायरी के सभी खंड ब्लॉग पर उपलब्ध है एक बार पढ़ने लें।
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