शनिवार, 19 सितंबर 2026

पूर्णिया डायरी- 24 (डुकारेल‌ और दीवान देवी सिंह)

1765 में इलाहाबाद की संधि के बाद जब ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली, तब कंपनी ने राजस्व वसूली को सीधे अपने हाथ में न लेकर 'द्वैध शासन' (Dual System) के तहत देशी अधिकारियों पर छोड़ दिया। भ्रष्टाचार, अकाल और प्रशासनिक अव्यवस्था के चलते इस प्रणाली में सुधार के लिए 1769 में कंपनी ने जिलों में 'सुपरवाइजर' (Supervisor) पद का सृजन किया।
इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में पूर्णिया में अंग्रेजी प्रशासनिक ढांचे की औपचारिक नींव पड़ी।
        सन् 1769 में जेरार्ड गुस्तावस डुकारेल (Gerard Gustavus Ducarel) को पूर्णिया का पहला सुपरवाइजर नियुक्त किया गया।
नियुक्ति का उद्देश्य स्थानीय भू-राजस्व व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, मालगुजारी के पुराने अभिलेखों की जांच करना, उत्पादन क्षमता को समझना और कंपनी के राजस्व को नियमिमित व अधिकतम करना।
 डुकारेल का कार्यकाल 1769–1770 के भीषण बंगाल और बिहार के महाअकाल (Chhiattarer Manwantar) के समानांतर था। इस दौर में पूर्णिया की एक बड़ी आबादी अकाल और भुखमरी की शिकार हुई, लेकिन कंपनी के कड़े आदेशों के कारण राजस्व वसूली की कठोरता में कोई रियायत नहीं बरती गई।
        सुपरवाइजर यूरोपीय अधिकारी होते थे, जिन्हें स्थानीय भाषा, भूमि बंदोबस्त की बारीकियों और प्रथागत कानूनों की गहरी समझ नहीं होती थी। इसलिए उनकी सहायता के लिए एक स्थानीय वित्तीय प्रमुख या 'दीवान' की नियुक्ति की जाती थी। पूर्णिया में डुकारेल के दीवान के रूप में देवी सिंह को नियुक्त किया गया।
देवी सिंह पूर्णिया में राजस्व आकलन, कर निर्धारण और वास्तविक वसूली के प्रमुख सूत्रधार थे। डुकारेल काफी हद तक उनके प्रशासनिक कौशल और वित्तीय तंत्र पर निर्भर थे।
              पूर्णिया में डुकारेल और देवी सिंह की यह साझेदारी भारतीय प्रशासनिक इतिहास में उस शुरुआती दौर का उदाहरण है जब पारंपरिक भारतीय दीवानी व्यवस्था को ब्रिटिश उपनिवेशवादी नौकरशाही में बदला जा रहा था। 1769 का यह सुपरवाइजर पद ही आगे चलकर कलेक्टर (District Collector) के पद में विकसित हुआ।

सुबोध 
20.9.2026

4 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. आपका नाम या संपर्क नंबर नहीं दिख रहा है क्या आप पूर्णिया से हैं

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  2. शानदार है पूर्णिया की कहानी,और पढ़ने की जिज्ञासा है---

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  3. धन्यवाद श्रीमान पूर्णिया डायरी के सभी खंड ब्लॉग पर उपलब्ध है एक बार पढ़ने लें।

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