इस गली की बात हो
या उस डगर की बात हो,
आँख में आँसू भरे हैं
किस सफ़र की बात हो।
आँख में आँसू भरे हैं
किस सफ़र की बात हो।
बस्तियाँ जलती रहीं,
और लोग चुप बैठे रहे,
राख हर आँगन में है अब
किस के घर की बात हो।
और लोग चुप बैठे रहे,
राख हर आँगन में है अब
किस के घर की बात हो।
हवा में बारूद है,
साँसों पे पहरा लग गया,
ज़िंदगी बेदम खड़ी है
किस असर की बात हो।
साँसों पे पहरा लग गया,
ज़िंदगी बेदम खड़ी है
किस असर की बात हो।
ज़हर की भाषा यहाँ अब
हो गई इतनी सुबोध,
प्यार का लहज़ा छुपा है
किस असर की बात हो।
हो गई इतनी सुबोध,
प्यार का लहज़ा छुपा है
किस असर की बात हो।
बाँटते हैं जो दिलों को
मज़हबों के नाम पर,
नफ़रतें जब बढ़ रही हैं
किस हुनर की बात हो।
मज़हबों के नाम पर,
नफ़रतें जब बढ़ रही हैं
किस हुनर की बात हो।
ख़्वाब आँखों में अधूरे,
रास्ते धुंधला गए,
रात का पहरा कड़ा है
किस सहर की बात हो।
रास्ते धुंधला गए,
रात का पहरा कड़ा है
किस सहर की बात हो।
सुबोध
7.10.26