ये नवादा शहर के प्रतीक बनते जा रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे नवादा की हृदयस्थली पर खड़ा प्रजातंत्र द्वार। स्थानीय जानकारी के अनुसार 25-30 वर्ष पूर्व इतनी बड़ी संख्या में इन प्रवासी पक्षियों का आगमन नवादा शहर में नहीं होता था। पूर्व में प्राकृतिक नवादा शहर इनके लिए आश्रयणी नहीं थी। नवादा जिला बनने के उपरांत यहाँ कई परिवर्तन हुए। कई सरकारी कार्यालय भवन एवं सरकारी आवासीय परिसर बने। अनुमंडल स्तरीय कार्यालय को उत्क्रमित कर जिला स्तरीय कार्यालय बनाया गया। वन विभाग की ओर से नवादा शहर के सभी सरकारी कार्यालय, आवासीय, विद्यालय परिसर एवं सड़क किनारे वृक्षारोपण कराया गए। इन्हीं वृक्षों पर आज हजारों प्रवासी पक्षी के जोड़े प्रवास काल में घोंसले बनाते हैं, प्रजनन करते हैं एवं नवजात पक्षियों का पालन-पोषण कर उन्हें उड़ना सिखाकर वापस गन्तव्य की ओर लौट जाते हैं।
प्रवासी पक्षियों के विषय में कम जानकारी के कारण इन्हें कुछ लोग साइबेरियन क्रेन कहते हैं जो सही नहीं है। यह पक्षी 'ओपेनबील स्ट्रॉक्स' के नाम से पक्षीप्रेमियों के बीच जाना जाता है। इनका यह नाम इनके लम्बे चोंच के बीच में रिक्त स्थान के कारण पड़ा जो इनके प्रिय भोजन घोंघे को पकड़ने और उसके कठोर आवरण को तोड़कर शेष भाग को खाने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। नवादा शहर में इसका कोई पूर्व प्रचलित स्थानीय नाम सुनने को नहीं मिलता है। अन्य स्थानों पर भिन्न-भिन्न नामों से इन्हें जाना जाता है। यथा- दोकर (Dokar), गुंगल (Gungal), घोंघल, घोंघिल, बंगाल में यह टोंट-भंगा (Tonte Bhanga), शामाच-बंगा (Shamach-Banga), सामुक खोल (Samuk-Khul) हाम्माक कास (Hammak-Kas), दक्षिण गोंड में पोउना कोंगा (Pouna Konga) आंध्रा में गलु कोंगा, तमिलनाडु में नारी कुटी नरेह (Nati-Kuti Nareh) श्रीलंका में करुणारार्य (Karunary), असाम में सामुक भांगा (Samuk-Bhanga)। यह सफेद एवं हल्के धूसर रंग का होता है। पंख का पिछला भाग काला होता है यह कन्ट्रास्ट सहज आकर्षण पैदा करता है। यह एक बड़े आकार के सारस प्रजाति का पक्षी है जिसकी ऊँचाई 76-81 से.मी. एवं पंखों की लंबाई 147-149 से.मी. है। इसका जीव वैज्ञानिक नाम Anastomus Oscitans है।
यह संपूर्ण एशियाई उप महाद्वीप एवं दक्षिण एशिया में पाया जाता है। भारत के अतिरिक्त श्रीलंका, थाईलैंड, बर्मा, बंगलादेश में सामान्य रूप से पाये जाते हैं। पाकिस्तान, सिंध एवं पंजाब में ये कम पाये जाते हैं। ऐशियन ओपेलबील 800 से 1500 कि.मी. की यात्रा कर इन्हीं क्षेत्रों से मानसून के साथ नवादा आते हैं। इनका समय से आना अच्छे मानसून का सूचक माना जाता है। सितम्बर माह में नवादा का आकाश इन प्रवासी पक्षियों के नव शावकों के उड़ान की प्रशिक्षणस्थली बना रहता है। जहाँ ये लम्बी उड़ान का प्रशिक्षण पाते हैं इसके बाद नवम्बर माह में दक्षिण भारत एवं दक्षिण पूर्व एशिया के लिए प्रस्थान करते हैं।
बिहार में नवादा के बाद दानापुर कैंट उल्लेखनीय प्रवास स्थल है। नवादा शहर में 'ओपेनबील स्ट्रॉक्स' प्रमुखतः सरकारी परिसर के विशाल दरख्तों के शीर्ष पर अपने घोंसले बनाते हैं। इनमें प्रमुख हैं :- समाहरणालय, अनुमंडल कार्यालय, निबंधन कार्यालय, गाँधी इन्टर विद्यालय, कॉपरेटिव बैंक, साहेब कोठी इत्यादि ये अपने घोंसले बनाने के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि दरख्त किसी भवन से सटा हुआ नहीं हो। एक वृक्ष पर पचास से 100 जोड़े घोंसले बनाते हैं जो हमेशा उसके शीर्ष भाग पर स्थित होता है। घोंसले हमेशा आस-पास के वृक्ष एवं छोटी टहनियों और उसके पत्ते से बनाए जाते हैं। एक मादा 'ओपेनबील स्ट्रॉक्स' तीन से पाँच अंडे देती है जिसे नर एवं मादा बारी-बारी से सेते हैं तथा उनका पालन-पोषण करते हैं।
इनका मुख्य आहार छिछले जल क्षेत्र एवं धान के खेतों में पाए जाने वाले घोंघे, केकड़े, कीड़े, मेंढ़क, छिपकली, छोटे साँप एवं मछलियां हैं। एक अनुमान के अनुसार नवादा शहर में प्रत्येक वर्ष लगभग तीन हजार से चार हजार प्रवासी पक्षी आते हैं। इनमें अल्प व्यस्क पक्षियों की पहचान यह है कि उनके चोंच के बीच में रिक्त स्थान नहीं होते हैं। वयस्क होने के बाद ही इनके चोंच के बीच में रिक्त स्थान बनता है।
वाइल्ड लाइफ अधिनियम 1972 के तहत इनका शिकार प्रतिबंधित है। इनकी घटती संख्या पर्यावरण विदों के लिए चिन्ता का विषय है। परन्तु नवादा में कुछ पक्षी प्रेमियों के प्रयास से 'नीड़ जगत' नामक एक संगठित समूह द्वारा इनके प्रति लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास वर्ष 2012 से प्रारम्भ हुआ है। यह संगठन इन प्रवासी पक्षियों के नवादा में संरक्षण एवं निर्वाध प्रवास को सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है। यह भविष्य में पक्षीप्रेमी पर्यटकों को नवादा आने का निमंत्रण देगा।
( जिला स्थापना दिवस 2013 की स्मारिका में पकाशित)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें