प्रसिद्ध इतिहासकार डा0 कालिकिंकर दत्त कि नजर जब बिहार के विभिन्न जिला अभिलेखागार में पड़े 18वीं एवम् 19वीं सदी के महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर पड़ी तो उन्होंने सरकार के समक्ष एक प्रस्ताव रखा. जो इन अभिलेखों को राज्य मुख्यालय में मंगाकर संरक्षित करने के संबंध में था. सरकार ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर लिया. जिला से अभिलेख के चयन की अहम जबाबदेही दत्त साहब को सौपी गयी .जब ये अभिलेख यंहा आ गये तो डा० दत्त को बिहार राज्य अभिलेखागार का संस्थापक निदेशक बना दिया गया . उन्ही की दूरदृष्टि और परिश्रम का परिणाम बिहार का राज्य अभिलेखगार है।
यहां ब्रिटिश काल के प्रारंभिक इतिहास के महत्वपूर्ण स्त्रोत सामग्री सुरक्षित है.कालांतर मे अभिलेखागार द्वारा कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी प्रकाशन किया गया है.
पूर्णिया जिले के 18वीं सदी के कुछ दस्तावेजों की तलाश में आज मै वहाँ गया था।पूर्णिया का सबसे पुराना अभिलेख वंहा वर्ष १७७५ का है. लगभग २५० वर्ष पुराना.